सुधा दूध के पैकेट में मिला जिंदा कीड़ा
दूध को हमारे देश में पूर्ण आहार माना जाता है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर घर में दूध स्वास्थ्य और भरोसे का प्रतीक है। ऐसे में जब किसी बड़े और प्रसिद्ध ब्रांड से जुड़े दूध के पैकेट को लेकर गंभीर सवाल सामने आते हैं, तो यह विषय केवल एक खबर नहीं रह जाता, बल्कि उपभोक्ता सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण पर बहस छेड़ देता है। इतना बड़ा ब्रांड, फिर भी गुणवत्ता पर सवाल क्यों? इतना बड़ा ब्रांड शुद्ध है—ऐसी आम धारणा उपभोक्ताओं के मन में रहती है। लेकिन जब पैकेज्ड दूध जैसे संवेदनशील उत्पाद में जिंदा कीड़े जैसी बात सामने आती है , तो यह सोचने पर मजबूर करता है कि: क्या पैकेजिंग प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है? क्या गुणवत्ता जांच हर स्तर पर प्रभावी है? क्या उपभोक्ता सिर्फ ब्रांड नाम के भरोसे रह जाए? डेयरी उत्पादों में गुणवत्ता नियंत्रण क्यों जरूरी है डेयरी सेक्टर में: स्वच्छता (Hygiene) कोल्ड स्टोरेज सील्ड पैकेजिंग नियमित लैब टेस्टिंग बेहद जरूरी होती है। किसी भी स्तर पर लापरवाही सीधे जनस्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। Mithila Dairy Farm का दृष्टिकोण Mithila Dairy Fa...